Vasant Panchami 2014 | Vasant Panchami in India | Vasant Panchami Auraiya

हमारे जीवन का समारोह है वसंत

वसंत पर लिखने का अर्थ है अपने समय की ऊर्जा को महत्व देना, तरुणाई को मान देना और सकारात्मक परिवर्तन की ओर कदम बढ़ाना। वसंत का तात्पर्य है फूलों का खिलना, वनस्पतियों का प्रसन्न हो जाना और धरती का श्रृंगार करना। वसंत हमारे मन का हरियाला क्षेत्र है। जितनी उल्लासमय श्रेष्ठताएं हमारे भीतर और बाहर हैं, वे वसंत का ही रूपक हैं। वसंत एक रंग है, जो छूटता नहीं। वह भाव-अनुभाव है। वह हमें अभिभूत करता है, क्योंकि वह प्रेम है या यों कहें कि प्रेम ही वसंत है। इसीलिए प्रेम विद्रोही होता है। वसंत विद्रोही होता है। जिस तरुणाई में विरोध नहीं, वह अकारथ होता है। यह विद्रोह मात्र प्रतिरोध के लिए नहीं है, यह है गतिशीलता को अर्थगर्भित करती मनुष्यता की यात्रा के लिए। वसंतपंचमी एक अवसर है, जहां से हम सरस्वती यानी वाक की शक्ति को ग्रहण करने के लिए आधार पाते हैं। यह शक्ति शब्दकोषीय अर्थों से भिन्न होती है। वसंतपंचमी को मात्र आनुष्ठानिकता से जोड़ना, वाक और वसंत के मूल संदेश का उल्लंघन है। यहां हमें नया विश्वास, नया संकल्प चाहिए। ‘श्री’ सौंदर्य है और ऐश्वर्य भी। यह सौंदर्य हजारों ग्रामीण, आदिवासी, शहरी स्लमों में लाना होगा विद्या के जरिये। पीले कपड़े बाहरी वातावरण बना सकते हैं, लेकिन असली उल्लास तो उन चेहरों पर लाने में है, जिनके घरों में रोजगार नहीं।

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असली फूल तो वे बच्चे हैं, जिन्हें विद्यालय जाना है। व्यक्तिगत प्रार्थना को संकल्प में बदलकर समूहवाची संकल्प तक जाना होगा। हमें व्यक्ति को इतनी प्रतिष्ठा देनी होगी कि वह सरस्वती बन जाए, वसंत बन जाए। व्यक्ति-विभेद को निरंतर कम करना वसंत के और निकट जाना है। जितनी समरसता बढ़ेगी, हमें लगेगा कि फूलों की गंध अधिक बढ़ रही है। वसंत जीवन को समारोह बनाता है, उत्सव बनाता है। रोजमर्रा का जीवन जीते-जीते समाज में, व्यक्ति में एकरसता आ जाती है। इसलिए जड़ता को तोड़ने के लिए उत्सवों की हरियाली आवश्यक है। यही अवसर है- स्वप्न देखने, फूलों की आभा में खो जाने का। वसंत में इसीलिए ऐंद्रिक अनुभूतियों का विस्तार और गहनता है। आज जीवन आनंदहीन, प्रेमहीन प्रतीत होता है, इसीलिए वह आवेगरहित होता गया है। जैसे जीवन से मादकता बिछुड़ गई है। लगता है, उसके पास स्वयं और समाज को देने के लिए प्रगाढ़ता बची ही नहीं है। बिना प्रगाढ़ता मनुष्यता का क्या अर्थ? जहां निकटता नहीं, वहां नीरसता छाएगी ही। विकल्प में सोशल साइटों का प्रचलन बढ़ेगा और ई-संपर्क साधे जाएंगे। मगर वहां वर्चुअलिटी होगी, आत्मीयता नहीं। रियलिटी व वर्चुअलिटी में संतुलन से ही हम सच्चाई को पकड़ पाएंगे। वसंत के उल्लास और विद्रोह को पहले जीवन में लाएं, फिर वर्चुअलिटी की ओर जाएं, वरना आप इंद्रधनुष नहीं देख सकेंगे, जो आपके ऊपर है, चांद की शीतलता नहीं महसूस कर पाएंगे, जो दूधिया शक्ल में आस-पास बिखरी है।

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