Chanakya Niti about Women

स्त्रियों से जुड़ी सिर्फ ये 5 चाणक्य नीतियां पढ़ लेंगे तो खुल जाएंगी आपकी आंखें

प्राचीन काल में भारत कई छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित था। उस समय मगध बहुत शक्तिशाली राज्य था, जिसकी राजधानी थी पाटलीपुत्र (वर्तमान में पटना) थी। इसी राज्य में एक महान आचार्य हुए थे, इनका नाम था आचार्य चाणक्य। चाणक्य ने भारत को विदेशी आक्रमणकारियों से बचाया एवं छोटे-छोटे राज्य में विभाजित भारत को संगठित किया था।

आचार्य चाणक्य ने उस समय चाणक्य नीति नामक ग्रंथ की रचना भी की थी। इस ग्रंथ में स्त्री और पुरुष के लिए कई उपयोगी नीतियां बताई गई हैं। ये नीतियां आज भी कई बातों का सटीक जवाब है।

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पहली नीति
मूर्खशिष्योपदेशेन दुष्टास्त्रीभरणेन च।
दु:खिते सम्प्रयोगेण पण्डितोऽप्यवसीदति।।
इस श्लोक में आचार्य कहते हैं कि मूर्ख शिष्य को उपदेश देने पर, चरित्रहीन स्त्री का पालन-पोषण करने पर, किसी दुखी व्यक्ति के साथ रहने पर दुख ही प्राप्त होता है।
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दूसरी नीति
दुष्टा भार्या शठं मित्रं भृत्यश्चोत्तरदायक:।
स-सर्पे च गृहे वासो मृत्युरेव न संशय:।।
इस श्लोक के अनुसार यदि कोई स्त्री दुष्ट स्वभाव वाली है, हमेशा कठोर वचन बोलने वाली है, चरित्रहीन है तो उसे छोड़ देना चाहिए या उससे दूर हो जाना चाहिए। इसी प्रकार किसी नीच व्यक्ति से भी किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखना चाहिए। जो नौकर अपने मालिक का आदेश नहीं मानता हो उसे कार्य से मुक्त कर देना चाहिए और जिस घर के आसपास सांप रहते हों वहां नहीं रहना चाहिए। जो भी व्यक्ति इन बातों का पालन नहीं करता है उसे मृत्यु के समान कष्ट भोगने पड़ते हैं।
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तीसरी नीति
आपदर्थे धनं रक्षेद्दारान् रक्षेद्धनैरपि।
आत्मानं सततं रक्षेद् दारैरपि धनैरपि।।
इस श्लोक के अनुसार किसी भी श्रेष्ठ पुरुष को आपत्तिकाल के लिए धन बचाकर रखना चाहिए। धन से भी अधिक अपनी पत्नी की रक्षा करनी चाहिए और पत्नी से भी ज्यादा स्वयं की रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि पति सुरक्षित रहेगा तभी उसका परिवार भी सुरक्षित रहेगा।
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चौथी नीति
यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दानुगामिनी।
विभवे यश्च सन्तुष्टस्तस्य स्वर्ग इहैव हि।।
आचार्य कहते हैं कि किसी पुरुष का पुत्र आज्ञाकारी हो और पत्नी वश में हो तथा धन की कोई कमी न हो तो उसका जीवन किसी स्वर्ग के समान ही है।
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पांचवीं नीति
कष्टं च खलु मूर्खत्वं कष्टं च खलु यौवनम्।
कष्टात् कष्टतरं चैव परगेहे निवासनम्।।
इस श्लोक में आचार्य ने स्त्री और पुरुष दोनों के लिए ही बहुत खास बात बताई है। आचार्य कहते हैं सबसे पहला कष्ट है मूर्खता, इसके बाद दूसरा कष्ट है जवानी और सबसे बड़ा है किसी पराए घर में रहना।
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समस्याएं सभी के जीवन में होती हैं और इन समस्याओं को दूर करने के कई रास्ते भी होते हैं। कुछ लोग सही समय पर सही रास्ता चुन लेते हैं और वे सफलता के पथ पर आगे बढ़ जाते हैं। वहीं कुछ लोग सब कुछ भाग्य या नियति के भरोसे छोड़कर बैठ जाते हैं, जीवनभर दुखी होते रहते हैं।
एक सामान्य बालक चंद्रगुप्त को अखंड भारत का सम्राट बनाने वाले आचार्य चाणक्य ने इस संबंध में कई महत्वपूर्ण सूत्र दिए हैं। इन सूत्रों को अपनाकर कोई भी इंसान सफलता एक नया इतिहास रच सकता है। चाणक्य ने कहा है कि नियति तो अपना खेल रचती रहती है और इस खेल के प्रभाव से हमें कभी दुख मिलते हैं तो कभी सुख। दुख के समय में एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि नियति केवल कोई संयोग मात्र नहीं है, नियति व्यक्ति को हर समस्या से निकलने के लिए विकल्प अवश्य देती है।
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बुद्धिमान इंसान वही है जो उन विकल्पों को पहचानकर, उनमें से सही विकल्प चुन लेता है। सबकुछ नियति के भरोसे छोड़कर बैठने वाले इंसान सदैव कष्ट और दुख के ही प्रतिभागी बन जाते हैं। ऐसे लोग जीवन में ना तो कुछ बन पाते हैं और ना ही कोई इतिहास बना पाते हैं। इसीलिए समझदारी इसी में है कि सही समय पर सही रास्तों को पहचाना जाए और उन रास्तों पर बिना समय गंवाए आगे बढ़ा जाए।
आचार्य चाणक्य की यह बात हर परिस्थिति में बहुत ही कारगर और समस्याओं से निजात दिलाने वाली है। जो भी इंसान नियति के इशारों को समझकर उन्हें जीवन में उतार लेता है वह नए इतिहास रच देता है। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए यह अचूक उपाय है।
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किसी भी मूर्ख व्यक्ति के सामने ज्ञान की किताबों का ढेर लगा देने से भी वह उनसे कुछ भी ग्रहण नहीं कर पाएगा।  किसी मूर्ख व्यक्ति के लिए किताबें मूल्यहीन ही है और किताबों में लिखी ज्ञान की बातें फिजूल होती हैं। अत: किसी भी मूर्ख व्यक्ति को समझाने में अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।
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आचार्य चाणक्य के अनुसार इस बात को व्यक्त मत होने दीजिए कि आपने क्या करने के लिए सोचा है, बुद्धिमानी से अपनी योजना का रहस्य बनाए रखिए और लक्ष्य की ओर चुपचाप बढ़ते रहें। अपनी योजनाएं किसी ओर पर जाहिर होने के बाद वह आपके क्षति भी पंहुचा सकते हैं और लक्ष्य तक पहुंचने में आपके लिए मुश्किल अवश्य बढ़ जाएंगी। इस बात का सदैव ध्यान रखें।
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चाणक्य के अनुसार जिस प्रकार यदि कोई सांप जहरीला ना हो तो भी उसे स्वयं को जहरीला ही दिखाना चाहिए। ठीक इसी प्रकार यदि कोई व्यक्ति समझदार या विद्वान न हो तब भी उसे दूसरों के सामने समझदार बने रहना चाहिए। इसी में भलाई है।
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आचार्य चाणक्य कहते हैं कि घर और समाज में आसपास के लोगों से मान-सम्मान प्राप्त हो, इसके लिए जरूरी है कि आपका व्यवहार सभी के साथ अच्छा रहे। ध्यान रखें कि किसी भी व्यक्ति के संबंध में हम जाने-अनजाने कोई अपमानजनक या कटू शब्दों का प्रयोग न करें। आचार्य चाणक्य के अनुसार फूलों की महक उसी दिशा में फैलती है जिस ओर हवा बह रही है। जबकि अच्छे इंसान की अच्छाई सभी दिशाओं में फैलती है। वह व्यक्ति हर ओर सम्मान प्राप्त करेगा, प्रसिद्ध हो जाएगा।
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