Why celebrate Ganesh Utsav?

क्यों मनाते हैं गणेश उत्सव?

 

Ganesh Ji

 

दस दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव का आज दूसरा दिन है जिसमें मुंबई समेत पूरा महाराष्ट्र गणपति के रंग में रंगा है. लालबाग के राजा के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु मुंबई पहुंच रहे हैं. बप्पा की माला, मुकुट से लेकर रंग बिरंगी सजावट की चीजे खरीदने के लिए लोग यहां दूर दूर से आते हैं. सभी बप्पा की भक्ति के रंग में सराबोर नजर आ रहे हैं.श्रद्धालु गणपति की प्रतिमा को अपने अपने और पंडाल में स्थापित करने के लिए ला चुके हैं. मुंबई में इस दौरान मंडलों की शोभा देखते ही बनती है.गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दर्शी तक गणेशोत्सव दस दिनों तक मनाया जाता है. भाद्रपद शुक्ल की चतुर्थी ही गणेश चतुर्थी कहलाती है.हिंदू धर्म-संस्कृति में अनेक देवी-देवताओं को पूजा जाता है. इन सभी में सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है. उनको विघ्ननाशक और बुद्धिदाता भी कहा जाता है. किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उन्हीं का नाम लेकर की जाती है.

 

Ganesh Ji 2013

 

वैसे तो देश के लगभग सभी शहरों में इस पर्व को मनाया जाता है लेकिन महाराष्ट्र में इस पर्व को विशेष धूमधाम से मनाये जाने की परंपरा है. यहां लोग घरों, मुहल्लों और चौराहों पर भव्य पंडाल सजाकर गणेशजी की स्थापना करते हैं. गणेश चतुर्थी से अनन्त चतुर्दशी तक अर्थात दस दिन गणेशोत्सव मनाया जाता है.

 

Ganesh Chaturthi 2013

 

लोककथा एक बार देवी पार्वती स्नान करने के लिए भोगावती नदी गयीं. उन्होंने अपने तन के मैल से एक जीवंत मूर्ति बनायी और उसका नाम ’गणेश‘ रखा. पार्वती ने उससे कहा-हे पुत्र! तुम द्वार पर बैठ जाओ और किसी पुरुष को अंदर मत आने देना. कुछ देर बाद स्नान कर के भगवान शिव वहां आए. गणेश ने उन्हें देखा तो रोक दिया. इसे शिव ने अपना अपमान समझा. क्रोधित होकर उन्होंने गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया और भीतर चले गए.

 

Ganesh Chaturthi

 

महादेव को नाराज देखकर पार्वती ने समझा कि भोजन में विलंब के कारण शायद वे नाराज हैं. उन्होंने तत्काल दो थालियों में भोजन परोसकर शिव को बुलाया. तब दूसरी थाली देखकर शिव ने आश्चर्यचकित होकर पूछा कि दूसरी थाली किसके लिए है?

 

Ganrsh Chaturthi

 

पार्वती बोलीं, दूसरी थाली मेरे पुत्र गणेश के लिए है जो बाहर द्वार पर पहरा दे रहा है. क्या आपने आते वक्त उसे नहीं देखा? यह बात सुनकर शिव बहुत हैरान हुए. उन्होंने कहा, देखा तो था मैंने. पर उसने मेरा रास्ता रोका. इस कारण मैंने उद्दंड बालक समझकर उसका सिर काट दिया. यह सुनकर पार्वती विलाप करने लगीं. तब पार्वती को प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव ने एक हाथी के बच्चे का सिर काटकर बालक के धड़ से जोड़ दिया. इस प्रकार पार्वती पुत्र गणेश को पाकर प्रसन्न हो गयीं. व्रत की विधि व्रत के दिन सुबह उठकर स्नान कर समूचे घर को गंगाजल से शुद्ध करना चाहिए. इसके पश्चात भगवान गणेश का धूप, दीप, पुष्प, फल, नैवेद्य और जल से पूजन करना चाहिए.

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