घोषणाओं से आगे नहीं बढ़ पाती हैं नेताओं पर बनने वाली फिल्में

नेता और राजनीति बॉलीवुड को लगातार प्रेरित करते रहे हैं। कई फिल्मकार नेताओं के चरित्र से प्रभावित होकर उन पर फिल्में बनाने की घोषणा करते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में ये घोषणाओं से आगे नहीं बढ़ पाती हैं। इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी, मायावती जैसी कई महत्वपूर्ण राजनीतिक हस्तियों पर फिल्में बनाने की कोशिश पहले भी हुई हैं।

अब भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी पर फिल्म बनाने का फैसला दक्षिण के फिल्मकार मणिशंकर ने किया है जो इससे पहले ‘नॉकआउट’ बना चुके हैं। यह भारत के पैसे को विदेश से लाने के मूल आइडिया पर आधारित थी। आडवाणी और उनकी पुत्री प्रतिभा के संपर्क में मणिशंकर हैं और फिलहाल फिल्म की पटकथा पर काम कर रहे हैं।

कहना मुश्किल है कि मणिशंकर की योजना सफल होगी या नहीं लेकिन कई उदाहरण हैं जब संबंधित नेताओं या उनके करीबियों ने ही इन फिल्मों में रुचि नहीं दिखाई। मृत्यु से पहले तक फिल्मकार जगमोहन मुंदड़ा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर फिल्म बनाने का सपना पालते रहे। जब उन्होंने ‘सोनिया’ नाम से फिल्म की घोषणा की तो पार्टी से जुड़े लोगों ने उन्हें कानूनी नोटिस भिजवाया। इसके बाद यह मामला ठंडा पड़ गया लेकिन मुंदड़ा की कोशिश जारी रही।

देहांत से पहले तक वे दावा करते रहे कि कांग्रेस के मन में फिल्म को लेकर जो शंकाएं थीं, वे दूर हो गई हैं और सोनिया की भूमिका के लिए वे मशहूर इतालवी अदाकारा मोनिका बलूची से बात कर रहे हैं। प्रख्यात लेखक स्व. कमलेश्वर (उनकी लिखी गुलजार की ‘आंधी’ में सुचित्रा सेन का किरदार कथित रूप से इंदिरा गांधी पर आधारित था जिस वजह से फिल्म के रिलीज होने में भी परेशानी हुई थी) ने अपने आखिरी दिनों में इंदिरा गांधी पर एक फिल्म लिखी थी जिसे फिल्म निर्माता और कांग्रेसी उत्तम सिंह पवार बनाने वाले थे। लेकिन यहां भी अनुमति की समस्या आ गई और फिल्म बन नहीं पाई।

अब भारतीय मूल के अमेरिकी कृष्णा शाह अस्ट्रेलियाई फिल्मकार ब्रुस ब्रेसफोर्ड की ‘बर्थ ऑफ ए नेशन’ में वे पैसा लगाएंगे जो इंदिरा गांधी के व्यक्तित्व और प्रधानमंत्रित्व काल के साथ बांग्लादेश युद्ध पर आधारित होगी। कांग्रेस का रुख स्पष्ट नहीं है। मायावती पर इशरक शाह नाम के फिल्मकार ने ‘एक बुरा आदमी’ नाम से फिल्म बनाने की घोषणा की, लेकिन बसपा के विरोध से फिल्म की कहानी बदल गई है।

कुछ साल पहले मायावती पर फिल्म बनाने की इकबाल अत्तरवाला की घोषणा के बाद बसपा ने फिल्म निर्माताओं के संघ को पत्र लिखकर उनपर बनने वाली किसी भी फिल्म के रिलीज होने से पहले अनुमति लेना जरूरी बताया। वैसे ही, दो साल पहले जवाहर लाल नेहरू और एडविना माउंटबेटन के कथित संबंधों पर आधारित फिल्म ‘द इंडियन समर’ को भारत में फिल्माने की ब्रिटिश फिल्म निर्माण कंपनी की योजना खटाई में पड़ गई क्योंकि भारत सरकार ने इसके कई प्रस्तावित दृश्यों पर आपत्ति की।

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One Response to घोषणाओं से आगे नहीं बढ़ पाती हैं नेताओं पर बनने वाली फिल्में

  1. CPMN, Communist Party Of Marxist New – National General Secretary-Dr.A.Ravindranath Kennedy is stated that,

    The Congress UPA Government is holding the anti people policy:-

    There is no doubt that, the capitalist policies of the ruling Congress UPA Government must not be allowed to continue in power. The unbridled corruption at higher echelons of the Congress –led UPA Government at the behest of corporate houses as manifest in the 2 G Spectrum Scam, the Commonwealth Games Scam, Godavari Basin Oil exploration Scam, Coal allotment Scam, Defense Helicopter Scam and improper implementation of Food Security Bill, Foreign Direct Investment Policy, Telangana issues e.t.c.,

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