दिल्ली में 2० रुपये की दाल, 2 रुपये की रोटी

दिल्ली के पहाड़गंज के कुछ ढाबों में दाल 2० रुपये की, एक रोटी दो रुपये की और एक प्लेट चावल 15 रुपये का मिल जाता है। इसी तरह आपको जामा मस्जिद के पास के कुछ ढाबों में 3० रुपये की थाली मिलेगी, जिसमें तीन रोटियां, दाल और सब्जी होगी।

किसी भी तरह से यह भाव दिल्ली और मुंबई में कांग्रेस पार्टी के सांसद और प्रवक्ता राजब्बर के बताए ‘12 रुपये’ और पार्टी के एक नेता रशीद मसूद के बताए ‘पांच रुपये’ के भाव से ज्यादा है।

बयान पर आलोचना झेलने के बाद बब्बर ने रविवार को एक बयान जारी कर खेद जताया है। बयान के बाद हकीकत जानने के लिए आईएएनएस का यह संवाददता पांच रुपये का एक सिक्का हाथ में लेकर जामा मस्जिद के आसपास गलियों में निकल पड़ा। उसने पाया कि इतने में आप मुट्ठीभर भुना चना खा सकते हैं या एक ग्लास नींबू-पानी ही पी सकते हैं।

तो आखिर पेटभर साधारण भोजन के लिए कितने रुपये चाहिए? जामा मस्जिद के पास भोजन का ठेला लगाने वाले असलम ने कहा कि कम से कम 25 रुपये। उनके ठेले पर मुख्यत: मजदूर और रिक्शाचालक भूख मिटाने पहुंचते हैं।

असलम ने कहा, ‘‘पांच रुपये में भोजन वाला बयान एक मजाक है। यदि कोई जामा मस्जिद के पास पांच रुपये में खाना बेच रहा होता, तो मेरा धंधा कब का बंद हो जाता।’’ एक प्लेट दाल-चावल खा रहे एक रिक्शा चालक रामशरण ने कहा कि वह रोजाना खाने पर 100 रुपये खर्च करता है। ताकत रहेगी, तभी तो रिक्शा खींच पाएगा।

उसने कहा, ‘‘पांच रुपये में क्या मिलेगा? सिर्फ एक पुड़िया खनी। एक कप चाय के लिए भी अब छह रुपये देने पड़ते हैं।’’ पहाड़गंज में जयहिंद ढाबे के मालिक सुनील नेगी ने कहा कि सरकार के किसी प्रतिनिधि की ओर से इस तरह का बयान दिया जाना अपराध है।

नेगी ने कहा कि उन्हें शर्म करना चाहिए कि एक तरफ वे महंगाई कम नहीं कर पा रहे हैं और दूसरी ओर ऐसे बयान देकर जले पर नमक छिड़क रहे हैं। हां, दिल्ली सरकार की जन आहार योजना के केंद्रों पर 15 रुपये में एक प्लेट खाना जरूर मिल जाता है, जिसमें चार पूड़ियां या तीन रोटियां या एक मुट्ठी चावल के साथ थोड़ी सब्जी और दाल मिल जाती है। रायता लीजिए तो पांच रुपये ऊपर से देने पड़ते हैं।

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