एक दिन की जिंदगी, फिर रद्दी का गोदाम

इधर कुछ दिनों से सूरज और अखबार में काफी साम्य है। जिस प्रकार सूरज की किरणें नित्य एक सी होती हैं, खबरें भी उसी गति को प्राप्त हैं। डॉलर उछल रहा है। रुपया टूट रहा है। भ्रष्टाचार के चर्चे, महंगाई की टीस, दिग्भ्रमित पक्षी और भटकते विपक्षियों की कांव-कांव। 2-जी तो खबरों का खंड-काव्य है। दो हजार चौदह की दावेदारी में नमो का जाप, ‘राग’ का राग-अलाप, एक स्वाद की खबरों के कारण बतर्ज दिल एक मंदिर, दिमाग घोटाले, काले धन की खबरों का ‘गोदाम’ बन गया है। बस तारीख बदलती है खबरें सेम टू सेम। सुबह सूरज के साथ ही निकलते हैं अखबार। अखबार पढ़ना भी व्यसन है। जैसी खबरें इन दिनों आ रही है उनसे सचेत रहने के लिए, पेश्तर इसके कि सुप्रीम कोर्ट आदेशित करे, अखबार मालिकों को खुद चेतावनी अंकित कर देनी चाहिए खबरें पढ़ना सेहत के लिए हानिकारक है।

शुरूआती पन्नों में ही राक्षसी घटनाएं। तीन वर्ष की बच्ची का बलात्कार राक्षस ही करते है। कुछ दिन पहले एक मंत्री जी के बोल ने महिलाओं को हिला दिया, दूसरे जौहरी साहब ने पार्टी की सांसद को पहले सौ टंच का माल बताया अब उलटा गुर्रा रहे हैं। अजब तमाशा है बोले तो मुश्किल। ‘न बोले’ तो मखौल उड़ाते हैं सभी। एक दिन की जिंदगी लेकर आते हैं अखबार। आज कुछ भी बोल लो, कल का दिन खंडन के लिए सुरक्षित। वैसे तो सभी को बोलना आता है लेकिन क्या बोलना है कैसे बोलना है कब बोलना है इसके लिए तमीज जरूरी है। उनके लिए गरीब का ‘पेट’ दिल के आकार का है तभी तो एक रुपये से लेकर पांच रुपये में ‘दिल’ भर जाता है। पालिटिक्स से जुडी खबरों के कुहासे में साहित्य का सूरज सिर्फ ‘रवि’-वार को झलक दिखाता है।

पाठक हमेशा आहत होती ही रहता है। उसकी राह में राहत कहाँ। काफी शोध के बाद निष्कर्ष की ये मछली मेरे कांटे में फंसी है कि खेल वाला पेज अखबार के अंत में क्यों होता है। भ्रष्टाचार,लूट-पाट, बलात्कार हिंसा-दुर्घटना, आदि से पटी खबरों को बांचने के बाद हे सुधी पाठक सब कुछ खेल भावना से स्वीकारें। टेक इट स्पोटिर्गली।

Advertisements

About Auraiya

Auraiya - A City of Greenland.
This entry was posted in Life Style, Seo and tagged , , , , . Bookmark the permalink.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s